ज़िन्दगी खफा क्या हुयी मुझसे;
अब तो आईना भी मुहूँ मोड़ने लगा |
बस माँ की दुआएँ साथ है,
वरना साया भी साथ छोड़ने लगा |
खुदेड़
मै पत्थर था, पत्थर ही रहने देता
मुझे की क्या जरुरत थी
खुद तो तेरी अंतरात्मा में था
उसे मंदिर में खोजने की क्या जरुरत थी
खुदेड़ 15.10. 2014
तुफानो में दीया तो जल लेंगे हम, पर उसमे ओट कौन करेगा ?
शराब कबाब की महफ़िल जमानी हमें आती नहीं है
सोच रहा था इस बार चुनाव में खड़ा हो जाऊं
पर मुझे वोट कौन करेगा?
खुदेड़ 27.10.2014
तुफानो में दीया तो जल लेंगे हम, पर उसमे ओट कौन करेगा ?
शराब कबाब की महफ़िल जमानी हमें आती नहीं है
सोच रहा था इस बार चुनाव में खड़ा हो जाऊं
पर मुझे वोट कौन करेगा?
खुदेड़ 27.10.2014
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