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Tuesday, February 19, 2013

पहाड़ तो अब पहाड़ में ही बर्बाद है


पहाड़ तो अब केवल साइबर मिडिया में आबाद है,
सच तो ये है पहाड़ तो अब पहाड़ में ही बर्बाद है ।

कुछ नुकसान पहुंचाया पहाड़ को सुआर और बन्दरों ने,
बाकि जो बचा उसे उजड़ा डाम के थोकदारों ने ।
जब से गाजर घास ने पहाड़ में पसारे है पाँव,
तब से बंजर के बंजर हुए पहाड़ के गाँव।
गाय भैन्स है नहीं अब, खेतों में कहाँ खाद है,
सच तो ये है पहाड़ तो अब पहाड़ में ही बर्बाद है ।

कुछ मिट्टी रेत हडफी पहाड़ की खनन माफियों ने,
बाकी जो बची थी उसे बहाया बरसाती आपदाओं ने।
कुछ हरे भरे जंगल स्वा किये गर्मियों की आग ने,
बाकि जो बचे थे उसे कटवाया बन बिभाग ने।
अपनी सरकार के पास नहीं कोई जवाब है  
सच तो ये है


कुछ खून की कमी ने मारा पहाड़ की नारी को कुछ को शराबी मर्द ने,
कुछ को इकुलांस के बोझ ने मारा कुछ को स्वीली के दर्द ने।
कुछ  बच्चों का भबिष्य अन्धकार किया हलधर मास्टर ने,
बाकि जो बचा था उसे हस्पताल के डाक्टर ने ।

मुख्यमन्त्री जी दिल्ली में मंत्री बिदेश की सैर में,
खूब लूट रहे है उत्तराखंड को दोस्तों दिन दोहपहर में।
कैसे करे बिकास न नीति है न नीयत है साफ,
जैसा प्रशासन है दोस्तों वैसे हम और आप।


प्रदीप सिंह रावत " खुदेड"

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