" ".
ब्लॉग पर किसी भी प्रकार का एड के लिए संपर्क करें - (प्रदीप सिंह रावत) - 9971989090

Friday, February 15, 2013

भगोड़ा सिपाई




मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ ।

मै उसकी बिषम प्रस्थिति से लड़ न सका,
मै उसकी कठोर मेहनत कश ज़िन्दगी में ढ़ल न सका।
मुझे जो आसान रास्ता दिखा मैंने उसी की चुनोतियों को स्वीकार किया,
मैंने उस पहाड़ से ज्यादा अपनी और अपनों की लाइफ को प्यार किया।
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ ।

मैंने एक बार भी नहीं सोचा,
मै पहाड़ के हित के लिए लड़ता तो मेरी आने वाली पीढियाँ न होंगी बेमुख,
उनकी राह के काँटों को मै चुन लेता तो  कभी नहीं मिलता उन्हें कोई दुःख।
पर मैंने इस पहाड़ के हाल को कुछ सत्ता लोभी नेताओं के हवाले छोड़ दिया,
चल उठा मै थैला लेकर शहर की ओर अपनी  जिम्मेदारी से मुख मोड़ दिया।
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ ।


मैंने कभी वहाँ के संसाधनों का उपयोग करने का प्रयाश नहीं किया,  
मैंने कभी वहाँ के भटके युवाओं को सही मार्ग दर्शन नहीं दिया।
मैंने अपनी ही पीड़ा को पहाड़ में सर्वपल्ली माना,
कभी वहाँ की माँ बेटियों के दुःख को नहीं पहचाना।
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ। 


क्या हुआ अगर मेरे सपने रह गए अधूरे, 
मेरे आने वाले दोस्तों के सपने तो होते पूरे। 
मुझे वहाँ के बिकास के लिए अपनी जवानी खपानी चाहिए थी, 
वहाँ के लोगो में अपने अधिकारों के प्रति एक क्रांति जगानी चाहिए थी। 
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ। 


प्रदीप सिंह रावत  "खुदेड" 
"http://"

No comments:

Post a Comment