सपनों की दुनियाँ कितनी छोटी है।
मानव कि कल्पनाएँ क्यों हमसे रूठी है।।
ज़िन्दगी के हर पल में मौत का साया है।
इस छोटी सी ज़िन्दगी में दुःख ने हमें बहुत रुलाया है।।
मिल जाये ज़िन्दगी में एक ऐसा कोना।
जहाँ कोई इंसान कभी दुखी हो ना।
जहाँ बस खुशियों कि हो हरियाली।
जहाँ हर दिन मने दिवाली।।
सपनों.. . . . . . . .
मानव.. . . . . . . .
मिल जाये ज़िन्दगी में एक ऐसा रास्ता।
जहाँ सच्चाई पर हो लोगों कि आस्था।
जहाँ इन्सान की हो अपनी पहचान।
जहाँ मन में बसते हो सबके भगवान।।
सपनों.. . . . . . . .
मानव.. . . . . . . .
मिल जाये ज़िन्दगी में ऐसा सार।
जहाँ कोई ना हो बेसहारा।
रहे आदमी अकेला वहाँ गर।
अन्धकार का न हो उसे वहाँ डर।।
सपनों.. . . . . . . .
मानव.. . . . . . . .
मानव कि कल्पनाएँ क्यों हमसे रूठी है।।
ज़िन्दगी के हर पल में मौत का साया है।
इस छोटी सी ज़िन्दगी में दुःख ने हमें बहुत रुलाया है।।
संगीता रावत
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