नि काट मेंतै रखलू मि त्वेतै अपड़ा छैल मा,
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अपड़ा रूठ जाला तेरा रौलू मि गैल मा।।
अन्न देयोलू ,पाणी देयोलू ऒलू बनि बनि का काम,
झपकै की बैठी मुडी मेरा तू रुड्यू का घाम मा।
घनघोर निंद पोड़ेली त्वेतै बैठी मेरा छैल मा,
अपड़ा रूठ जाला तेरा रौलू मि गैल मा,
नि काट मेंतै रखलू मि त्वेतै अपड़ा छैल मा॥
दुःख बिपदा सूण मेरि तू , निजड़ी मेरि तू नि कैर,
हर घड़ी अयो काम तेरा मि आखिर क्या च तेरू मेसे बैर।
बूणी ऐकी सुप्नया तू बैठी की मेरा छैल मा,
अपड़ा रूठ जाला तेरा रौलू मि गैल मा,
नि काट मेंतै रखलू मि त्वेतै अपड़ा छैल मा॥
अधिकार तेरू ही नीच में परे, मि औऱ कू भी सारू छौ,
जन तू अपडा ब्वे बाबू कू, तनि मि यी धरती कू प्यारू छौ।
झूला झूली तू ऎकी मेरा छैल मा,
अपड़ा रूठ जाला तेरा रौलू मि गैल मा,
नि काट मेंतै रखलू मि त्वेतै अपड़ा छैल मा॥
बसंत ऋतु मा औलू मि बणि कि यी धरती कि ब्योली,
फूलू कि बरात आली दगड़ा मेरा, सजेली मेरि डोली।
दगड्यों दगड़ी खेली तू ऎकी मेरा छैल मा,
अपड़ा रूठ जाला तेरा रौलू मि गैल मा,
नि काट मेंतै रखलू मि त्वेतै अपड़ा छैल मा॥
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