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Friday, March 28, 2014

अठवारों बागी

अठवारों बागी(बेला) बणयूँ त्वेतै,हे मेरा उत्तराखंड।  
ज्यू आयी सैनी कैरी त्वेतै उतणदंड।  

कभी स्वामी त कभी कोश्यारी जी, 
कभी मुचर बोडा त कभी तिवारी जी।  
कभी निशंक त कभी बहुगुणा जी, 
आपदा की मार मा अब हरीश रोणा जी।  
पूरा देश मा कन कै तुमन ये पहाड़ै की झंड,  
अठवारों बागी(बेला)बणयूँ त्वेतै,हे मेरा उत्तराखंड, 
ज्यू आयी सैनी कैरी त्वेतै  उतणदंड।  

लाखो करोडो फुक देन तुमन शपत लेण मा, 
करोडो अरबो फ़ुकिन तुमन चाय पेण मा।  
पहाड़ो मा कम देहरादून दिल्ली मा ज्यादा  रयाँ,  
क्या बोन दिदो तुम ऐ पहाड़ा कभी नि हुयाँ।  
हर साल अपदो कू डंकारी तुमन फंड, 
अठवारों बागी(बेला)बणयूँ त्वेतै,हे मेरा उत्तराखंड,  
ज्यू आयी सैनी कैरी त्वेतै उतणदंड।  

अब महाराज जी कना छन तैयारी,
दीदों अब ता लगणु च मेरी भी आली बारी।  
झणी कुझेणी अब यू क्या फरकला,
रेले की स्याणी मा हमते फिर टरकाला।  
अपदा का टूट्या पहाड़ तै खिलाला कतगा खंड, 
अठवारों बागी(बेला) बणयूँ  त्वेतै,हे मेरा उत्तराखंड, 
ज्यू आयी सैनी कैरी त्वेतै उतणदंड।  

प्रदीप सिंह रावत '' खुदेड''
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