न जाने क्यों याद आते है गाँव
जिस चीज के लिए मैंने गाँव छोड़ा
वह मुझे मिल तो गयी
फिर क्यों याद आता है गाँव
सब कुछ तो पाया है मैंने
फिर भी लगता है
कुछ तो खोया है मैंने
बोझ तो मै यहाँ भी उठता फिर रहा हूँ
गाँव में मिलकर उठाने वाले कई थे
यहां अकेले गिर रहा हूँ
रोटी मिल तो रही है मुझे
फिर क्यों बेचैन हूँ गाँव की रोटी के लिए
दोस्त तो यहाँ पर भी है
फिर क्यों बेचैन हूँ गाँव की दोस्ती के लिए
न जाने क्यों याद आते है गाँव
जिस चीज के लिए मैंने गाँव छोड़ा
वह मुझे मिल तो गयी
फिर क्यों याद आता है गाँव
नीद आती है पर सो नहीं पाता हूँ
आँखों में आंसू आते है पर रो नहीं पाता हूँ
जब से कुछ सपने पुरे क्या हुए
अब सपने नहीं आते
जब से घर क्या खरीदा है
अब अपने नहीं आते
बीमारी में मुझे मिल रही दवा
फिर क्यों आती है माँ की दुआ
सफर तो कर रहा हूँ मई ac गाड़ी में
फिर भी जाने की लालसा होती है गाँव की माटी में
खुदेड़
तारीख २१. 10. 2014
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