" ".
ब्लॉग पर किसी भी प्रकार का एड के लिए संपर्क करें - (प्रदीप सिंह रावत) - 9971989090

Friday, January 23, 2015

उठ खडू

उठ खडू देख अंधेरु छँटेगे
सुबेर व्हेगी घाम ऐगे

अब ये पहाड़ मा भी जगगी चकबंदी की लौ
धैर काँध मा थैला ये आंदोलन मा तू भी अौ
सुण यी धरती तू भी खैरी बिपदा
खंद्वार व्हेगेँ कुड़ी , मनखी लाइन यी आपदा
उठो तू भी मशाल अंधेरु हटेदे
उठ खडू देख अंधेरु छँटेगे
सुबेर व्हेगी घाम ऐगे

क्या सेठ, क्या गरीब क्या मजदूर
सभ्यून ठानेल अब चकबंदी नीच  दूर
आगाज हमुन कैरेल, अब आगाज देखा
अब अपुडु बिरोणु छोड़ा, समाज देखा
रात घनघोर ओंसी की अब हमारी कटेगी
उठ खडू देख अंधेरु छँटेगे
सुबेर व्हेगी घाम ऐगे

कब तक ताश खेलणी रैली बैठी मनखी चोपड़मा
कब तक डुब्यू रैली मनखी दारु की बोतल मा
कुछ त सोच, कुछ त कैर ज़िन्दगी मा
स्वर्ग प्राप्त होलु त्वेयी धरती की बंदगी मा
औ हाथ पकड़ तू अपड़ी मोह मया हटेकी
उठ खडू देख अंधेरु छँटेगे
सुबेर व्हेगी घाम ऐगे

हिमशिखो बाटी भी व्हेगी शंख नांद
प्रदेश बाटी भी एैगी चकबंदी की आवाज
फूल बीरे की कांडा छोड़ ग्या तुम यूँ डाँड्यूमा
माटू छाणीकी गारा छोडग्यां तुम यूँ कांठ्यूं मा
अब मुठ बोट्ली तू, पहाड़ अब बौत लुटेगी
उठ खडू देख अंधेरु छँटेगे
सुबेर व्हेगी घाम ऐगे



खुदेड़ १६.०१.2015
"http://"

No comments:

Post a Comment