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Thursday, September 3, 2015

हे माँ सरस्वती !

हे माँ सरस्वती ! हे माँ सरस्वती !
सुर दे ताल दे माँ, हमते सरगम दे,
अन्यो का खिलाफ लडै की शक्ति हरदम दे। 
हे माँ सरस्वती ! हे माँ सरस्वती !
तेरि जोत हम जगाणा छौ माँ,
तेरु भोग हम लगाणा छौ माँ।
ज्ञान दे गुण दे माँ, हमते शांति दे,
मनमा हमरा माँ विचारूँ की क्रांति दे ।
अपड़ा आँचल कू माँ हमते छैळ दे,
भूलवश जाम्यूं जू मन मा मैल वे ध्वे ।
तेरि जोत हम जगाणा छौ माँ,
तेरु भोग हम लगाणा छौ माँ।
आपदा से निकाई माँ हम ते बचे बिपदा से,
धीरज दे धैर्य दे माँ हमते विनय सम्पदा दे। 
दौ-दया दे माँ हमते तू धर्म दे,
हमरि आंख्यूं मा, माँ लाज-शर्म दे। 
तेरि जोत हम जगाणा छौ माँ,
तेरु भोग हम लगाणा छौ माँ।
भाषा बोली ते माँ तू ये जगमा मान दे,
द्वी आखार लिख्यान जू यूँ ते सम्मान दे। 
नदी नयारूं ते माँ तू जल का भण्डार दे,
हमते हिम पुत्रूं माँ तू बिद्या कू डडवार दे। 
तेरि जोत हम जगाणा छौ माँ,
तेरु भोग हम लगाणा  छौ माँ।
यी प्रकृति ते माँ तू हरियाली दे,
यूँ पुंगड़्यूं ते माँ तू खुशहाली दे।
भलु सभो माँ हमते भली काया दे,
सच्चे का बाठा हिट सका जू इना पेय दे।
तेरि जोत हम जगाणा छौ माँ,
तेरु भोग हम लगाणा  छौ माँ।
प्रदीप सिंह रावत ''खुदेड़''

date - 03.09.2015
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