कब
तकै लुट्दा तुम ये पहाड़ ते,
हम
भी देखदा ज़रा !
कब
तकै फोड़दा तुम ये गढ़वाल ते,
हम
भी देखदा ज़रा !
तुम
जित्दा या यू पहाड़ जितदू,
हम
भी देखदा ज़रा !
कब
तकै निचोड़ादा तुम यी नदी नयार ते,
हम
भी देखदा ज़रा !
कब
तकै पिचोंड़दा तुम यी मौयार ते,
हम
भी देखदा ज़रा !
नयार
नीचड़ोंदी, या तुम पिचोड़ेन्दा,
हम
भी देखदा ज़रा !
कब
तकै मोरण देंदा स्वीली ते तुम
पीडां
अस्पताल की पैड़ीमा,
हम
भी देखदा ज़रा !
कब
तकै बिकण देंदा तुम
डॉक्टरुं
की पोस्टिंग रुप्यों की थैली मा
हम
भी देखदा ज़रा !
स्वीली
की पीड़ा जितदी या
तुमारी
बणायी क्रीड़ा जितदी
हम
भी देखदा ज़रा !
कब
तकै थामी सकदा तुम,
यू
मनख्यूं का उमाळ ते,
हम
भी देखदा ज़रा !
कब
तकै बंधे सकदा तुम
धीरज
रख्या जवान ते,
हम
भी देखदा ज़रा !
भाप
बणी ऊ उमळदन,
या
तुमते फुक्दान,
हम
भी देखदा ज़रा !
कब
तकै झूठा वादों की थपकी मा,
हिमपुत्र
ते सुनींद राख्दा तुम,
कब
तकै की आपदा जाळमा फंसे की निश्चिंत रैंदा तुम,
हम
भी देखदा ज़रा !
अपड़ा
सवालू ते लेकी या जनता
सड़क्यूँ
मा आंदी की नी आंदी,
हम
भी देखदा ज़रा !
पुरणा
क्रांतिकारयूं का किस्सा सुणी,
क्वी
न क्वी नौजवान तपी की आग कन नी होलू बणू
हम
भी देखदा ज़रा !
प्रदीप
सिंह रावत ''खुदेड़''
03.08.2015
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