न किसी नेता का अंगरक्षक बन कर मरूं मै।
न इन भ्रष्ट बेमान नेताओं की हिफाजत करूं मै ।
मुझे भेज देना देश की उस सरद पर ये! भारत माता ।
देश की सीमा पर लड़ते हुए मरूं मै यही है मेरी ब्यथा ।।
मरने के बाद तिरंगे का कफ़न मिले मुझे, मिले तीनो सेनाओं की सलामी ।
चुलू भर पानी में डूब के मर मै जो इन देश द्रोही नेताओं की करूँ गुलामी ।
देश ने बिश्वाश किया है जो मुझपर उसे मै कभी नहीं तोडूँ ।
सीन पर गोली खालू पर अपने फ़र्ज़ से कभी मुहूँ न मोडूँ ।
इन बर्फीली हवाओं इन रेगेस्थानी फ़िजाओं से जोडू मै अपना नाता ।
मुझे भेज देना देश की उस सरद पर ये! भारत माता ।
देश की सीमा पर लड़ते हुए मरूं मै यही है मेरी ब्यथा ।।
जब मेरा जनाजा उठे तो मेरे माँ बाप अपने पर इतराये ।
अपने बेटे की शौर्या गाथा लोगों को बड़े फख्र से बतलायें ।
मुझे न बीर,न शौर्या चक्र चाहिए, न चाहिए कोई पुरस्कार ।
हर नौजावान के दिल में देश पर फना होने का जज्बा हो ये करना मुझपर उपकार ।
हर भारतवाशी सैनिको की बिरगाथा को सिराने तले रखकर सोये यही मै चाहता ।
मुझे भेज देना देश की उस सरद पर ये! भारत माता ।
देश की सीमा पर लड़ते हुए मरूं मै यही है मेरी ब्यथा ।।
प्रदीप सिंह रावत " खुदेड़"
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