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Saturday, November 16, 2013

बुण्या सुप्नया

बुण्या सुप्नया सब टुटि गैन, 
बिश्वाश कैरी जौं पर वी हमते लूटी गैन।।    

झण्डा हाथ मा छौ सभ्यूं कू एक छौ नारू, 
आस लगायी छे सभ्यू कि उत्तराखंड बणोलू हमारू।  
गंगा जमुना भी धै लगाणी छै हिमालय लेणू छौ अंगड़ाई, 
कोदू झंगोरू खैकी ते शहिदून उत्तराखंड बणाई।  
हाथ टुटिन, खुटा टुटिन, कयूँ का कपाळ फूटी गैन,
बिश्वाश कैरी जौं पर वी हमते लूटी गैन॥  

बेटी ब्वारयू पर भी टुटी दुःख बिपदों कु पहाड़, 
पहाड़ का कोणा- कोणा बटी लगाणी छै ऊ शेरनी सी दहाड़।  
यूंकि कुर्वानी ते भी नि करदन स्यू याद, 
खैर खबर नि लेन्दन स्यू जितणा का बाद।  
नेतों का पैथर चल्द चल्द घिसी हमरी खुट्टी गैन,  
बिश्वाश कैरी जौं पर वी हमते लूटी गैन॥  

चुनाव मा दिखेंदन स्यू बसगळ्या गुरुव सी, 
घार- घार मा बोट मंगदन स्यू बिग्यू बिरोव सी। 
एक क्या  हजार वादा स्यू जनता मा कैर जनदन  
फिर पाँच साल से पैली स्यू दुबरा नि दिखेंदन,  
जनतो कू हिसो खैकी गोलु हमरू घूटी गैन, 
बिश्वाश कैरी जौं पर वी हमते लूटी गैन॥  

साहब ही क्या चपरासी भी रिश्वत खाणू च, 
हमरि आंख्यूँ की समणी उत्तराखंड कु बाठा जाणू च।  
अब बिजि जावा तुम धै लगाणू च बद्री बिशाल, 
बर्वादी कि तरफ जाण से बचवा ये गढ़वाल।  
इतिहास गवा च जू उठीन अबेर मा वु पैथर छूटि गैन,  
बिश्वाश कैरी जौं पर वी हमते लूटी गैन॥  

  
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