बारह बरसू बाद मौरी कौथिग ऐगे
आपणो की समवोण आज दगड़ा लैगे
खुली गेन बरसू बटी बंद मोर द्वार
गगवाड़ स्यूं मा ऐगे देखा बहार
चौक डिडली लिपै गेन घोर कुड़्यूं की
जुग- जुग तक याद राली ऐंसू रुडीयूँ की
देश प्रदेश गया मवोसो तै भी लगी पराज
घार बोड़ी गेन स्यू नई छवाई लेकि आज
रांसा लगान्दू क्वी, कैन मांगी कथा
रून्द-रून्द सुणादी रूपेणा अपणी ब्यथा
थौडा चौक मा ढोल दमौ बजण बैठी गैन
ये दीदी भुल्यूं देखा, पांडवो नचण बैठी गैन
हनी भुलान चढ़म ढोल्या काँध मा उठाई
चार रिंगोट वेन चांदणा चौक मा लगायी
कण भलू नचणान नया छवीका ग्वाल बाल
दाना सयेणो की दगड़ा मिलाणा छन ताल
धन रे तमलाग का ये जन मानस आज
सफल बणाई तुमन जू मौरी को काज
मौरी होली आखिरी या जोँकि
अगली मौरी मा याद आली तौंकी
खुद तुम्हारी हमते रुवाली
तुम्हारी दगड़ा बिताया पल याद दिलाली
प्रदीप रावत ''खुदेड़''

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