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Sunday, June 22, 2014

MORI MELA मैत बटि रैबार

मैत बटि रैबार अयुचा 
हे जी मिन मौरी कौथिग जाण 

सूण हे ब्वारी मेरी भी लालसा 
मिन भी मौरी कौथिग आण

दो दगड्या मेरि मैत आणी होली 
मेते मेरि दगड्या खुज्याणी होली 
बरसू की खुद मिन वूमा बिसराण
हे जी मिन मौरी कौथिग जाण 

उम्र कू चा मेरू आखरी पड़ौ
हे ब्वारी मेंतै भी तू मौरी कौथिग लीजौ
सत का ज्यूंदाळ् मिन भी लगाण
हे ब्वारी मिन भी मौरी कौथिग आण

हे दिन हे रात्यूं तुम छोटी व्हे जावा 
में तै अब और इंतज़ार नि करवा 
खुद मा खुदेणू च मेरु प्राण 
हे जी मिन मौरी कौथिग जाण 

सुण हे भाभी मेरि भी तू बात 
मिन भी देखण पंडो कू नाच
ढोल्या मिन भी काँध मा उठाण 
हे भाभी मिन भी मौरी कौथिग आण 

मैत ता मि आंदी जांदी रयो 
पर इना दिन कभी नि जियो
भैरो मा मिन भेलि घान्ड चणाण 
हे जी मिन मौरी कौथिग जाण 

प्रदीप रावत ''खुदेड़'' 
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