आंदोलकारी नानीसर में डंडे खाते दलालों की मौज है।
तुम्हारे लिए अनशन पर है कोई जेल में।
तुम फंसे हो न जाने किस खेल में,
तुम्हारे लिए अनशन पर है कोई जेल में।
तुम फंसे हो न जाने किस खेल में,
तुम्हारे लिए अनशन पर है कोई जेल में।
तिवारी जी पर गुंडे हमला करते ननिसार में,
तुम्हारे लिए अनशन पर है कोई जेल में।
तिवारी जी पर गुंडे हमला करते ननिसार में,
मैदान में आने दो तुम इन्हे सत्रह के वार में।
स्याही भले मिट चुकी है ऊँगली की,पर वादे याद है,
कौन आया था जनता के आँसू पोछने सारे प्यादे याद है।
तुम फंसे हो न जाने किस खेल में,
तुम्हारे लिए अनशन पर है कोई जेल में।
तुम फंसे हो न जाने किस खेल में,
तुम्हारे लिए अनशन पर है कोई जेल में।
कल्जीखाल ब्लॉक के लोगों ने प्रशासन को आईना दिखाया है
अपने अपने हौंसले से चार मील सड़क को बनाया है
अगर हम एक हो चले तो, चटान को भी तोड़ सकते है
साथ अगर चलो तो नदी को भी मोड़ सकते है
तुम फंसे हो न जाने किस खेल में,
तुम्हारे लिए अनशन पर है कोई जेल में।
तुम्हारे लिए अनशन पर है कोई जेल में।
प्रदीप रावत "खुदेड़"
दिनाँक - 8 . 03 . 2016
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