अगर होंसला बुलंद चा
त असमान झुकी
सकदूचा,
अगर मन माँ
बिश्वास च त
मटेवा मा पाणी
रुकी सकदू चा।
दूर चाँद से
पार गैणो मा
जै सकदे तू , अगर इरादू तेरु
पाकू चा,
पत्थर मन भी
पिघली सकदू चा
अगर प्रेम तेरु
सच्चू चा ।
ज़िन्दगी का हर
इम्तियाँ मा व्हे
जैलू तू पास,
ना बैठ तू
सोच मा न
हू तू उदास।
पहाड़ ते भी
चीर सकदे तू
अगर त्वेमा पसीना
बोगाणे ताकत च,
ईमानदारी कू धन
च तेवमा अगर,
हर चीज मुले सकदे
तू चाहे विन्की
कत्गा भी लागत
च।
बथों बथोणी मा भी
जगे सकदे तू
बड़ा आराम से
जोत,
अगर मन मा
तेरा च पुण्य
की सच्ची ओट ।
अपड़ा करमू का
उजैवन कैर दी
तू अन्देरू कु नाश,
ना बैठ तू सोच मा न हू तू उदास।
करेला भी मिटू
लगोलू त्वे अगर
तेरा मन मा
मीठाश च,
शहद भी खट्ठी
लगेली त्वे अगर
जिकुड़ा मा तेरा
खट्हास च।
यी दुनिया का
तमाम तलाब छोड़ा
छंचेड़ा और सागर,
नी
बुझे सक्दन
तेरी तीस
जब तक मन
मा तेरा च लालंच की गागर ।
लालंच छोड़ दीक
ओंसी बूंद भी
बुझे सकदी चा
तेरी प्यास,
ना बैठ तू सोच मा न हू तू उदास।
अफू ते इन
बाणो की अगर
ठोकर लगेली त्वेते त पीड़ा
होली डांगमा,
न राहु न
केतु कै भी ग्रह
कु प्रकोप नी लगोलू
तेरा भागमा।
तैरुण वी सिखदू जु नयार मा
फवाक मरदू,
सफल वी इंसान
होंदु जु कष्ट
देखी नी डरदू।
ज़िन्दगी का हर इम्तियाँ मा व्हे जैलू तू पास,
ना बैठ तू सोच मा न हू तू उदास।
प्रदीप सिंह रावत
( खुदेड़
फ्योली की अन्ख्युं मा आंसू पुस्तक बटी
सर्व अधिकार सुरक्षित
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