कल्पना कबिता बणीन
कबिता बणीन गीत
गीत
तोडला मेरा, ये
समाजे की कुरीत
जू
मिन यी दुन्या समाज मा देखी
वी
मिन अपणी कबिता
और गीतू मा लेखी
मेरा
गीत सूणी कैते बुरी लगी, कैते
लगी भली
यूँ
गीतू मा लेखी
सच्चे कई ते
मीठी लगी, कई
ते लगी कड़ी
जूँ
ते सच्चे कड़ी
लगी वुन मेते
जेल भेजणे तैयरी
कैन
जूँ
ते या सच्चे
सच लगी वू
मेरा दगड़ा ऐ
गेन
एक
नेता जू यी
जनता ते जात
पात मा बंटणू
छो
सता
की कुर्सी मा बैठी
हमते लूटणू छो
मिन
बस खारा भीतर
ढकी चिंगारी मा जोळ
लगायी
जात
पात और धर्म
का नाम मा
सियी जनता ते
बिजाई
गीत और् कबिता
बणीन मेरी लोकतन्त्र कि जबान
सच्चु
जनतन्त्र तब् होलु
जब् जनता का
हाथ् आली कमान
मेरु
और् मेरा बटि
की हमते भ्यार
आण पोडोलू
अपडू चरित्र हमते इत्गा स्वच्छ बणाण पोडोलू
प्रदीप सिंह रावत खुदेड
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