क़र्ज़ च तुम परे मात्रभूमि कु अभी शेष
पढ़ी लेखी की बैठा छा तुम प्रदेश
आस छै तुम परे देव भूमि की एक हजार
एकी ते घार कल्या अपड़ा मुल्क कु उद्वार
पीठ फ़रकैकी बैठा छा तुम अपड़ा मुल्क जना
खैर खबर नि लेणा छा तुम इखे भ्यारा छन ईख राज़ कना
जख मन्खी रैंदा छा वुख बस्गेन खबेश
क़र्ज़ च तुम परे देव भूमि कु अभी शेष
झूठू चोला पह्न्यु तुमरु सुदी मुदे की च स्या शान
बिरोणो त छोड़ा अपुडू भी नि करदू तै प्रदेश मा मान
परदेशी रंग मा रंगणा छा तुम छोड़ी की अपड़ा बार त्यौहार
सूणी च मिन कैमा कि अब रुखू रुखू व्हेगी तेरु ब्यवहार
जों पुन्ग्ड़ो कु नाज खै तिन जिलका जम्यान मवोणी ढेश
क़र्ज़ च तुम परे मात्रभूमि कु अभी शेष
जै भूमि मा देवतों कु वास च थाती ते तुम छोड़णा छा
अपड़ा गोँ गुट्यारु बटि किले मुख मोड़णा छा
सहारा लगी च वा भ्यारी कब मेमा दीव जगालू
आस लगाईच वे भीतरे कब इखो अंधेरु भगालू
अड़ान्दोडू नि क्वी कैन बताण यूँ नोनो ते सु बाठू
जुआ शराबन पलित करेल देवभूमि कू माठू
तुम जख भी रयाँ अपड़ी यी पितृ भूमि ते नि भुल्या
आशिर्वाद देणू च बद्री बिशाल तुम हमेशा सुखी
कब बोडोलू लटयवा अपड़ा गढ़देश
तुम जख भी रयाँ अपड़ी यी पितृ भूमि ते नि भुल्या
आशिर्वाद देणू च बद्री बिशाल तुम हमेशा सुखी
कब बोडोलू लटयवा अपड़ा गढ़देश
No comments:
Post a Comment