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Tuesday, September 4, 2012

रंत रैबार खबर सार  लेकी आंदी छै ज्वा चिट्टी 
कख हरची वा, अपड़ा दगड़ा गाँव गोलों की लेकी आंदी ज्वा मिट्टी 

जै ते पोढ़ी की बरखुदू  ब्वे बाबू कु प्यार 
हर आखर याद दिलान्दू छो अपड़ा मुल्को कू त्यौहार 
छलकेणी रैंदी छे ज्यमा मायादारे की माया की गागर 
बांची बांची की डूब जांदा छा मायादार माया का सागर 
कख हर्ची वा 
रंत रैबार खबर सार लेकी आंदी छे ज्वा चिट्टी 
अपड़ा दगड़ा गाँव गोलों की लान्दी छे ज्व़ा मिट्टी 

भै बैणो की आंखी थक जन्दी छे डाकियो कू बाठू  हेरी हेरी की 
सौन्जड़या ते बडुली लगदी छे सुवा की याद मा बेरी बेऱी 
रौनक मुखड़ी मा ऍ जान्दी छे जब चिट्टी अंडी छे घार 
खुद लगाण बैठी जांदू  छो अपड़ो कू प्यार 

कख हर्ची वा 

एक कागज़ कु टूकड़ा बाणी जांदू छो ज़िन्दगी कू हिस्सा 
दगड्यो  ते याद दिलान्दू छो वू बालपन का किस्सा 
 क्वी बिचोरु आंसून  लेखदू  छो कैन बणाई ल्व़े की स्याई 
कैन सोना का आखरन लेखी की अपडू प्रेम बयाँ  कायी 
रंत रैबार खबर सार लेकी आंदी छे ज्व़ा चिट्टी 
कख हर्ची वा अपड़ा दगड़ा लेकी आंदी छे ज्वा गाँव गोलों की मिट्टी  
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