बुढ़ापा आन्द देखेणू च ज्वानी नि देखेणी जान्द
सच्ची बोल्यू च पन्दरा पच्चीश सैदेनी कैमा नि रांद
दांत टुटण बैठगेन हमरा फूलण बैठीगेन बाळ
सांस भी फूलण बैठीगे हमरि, नि चढ़ेणी च उकाल
खुट्टा भी साथ छोड़णा अब हमरा साहरू देणू च लाठू
झणी कब उड़ला प्राण पखेरू मेरा कब बणोंलू यू शरील माटू
कमर झुकणी च मेरि आँख्यू मा रोशनी नि आन्द
बुढ़ापा आन्द देखेणू च ज्वानी नि देखेणी जान्द
ज़िन्दगी पराया अब हमरी व्हेगी
जीवन संगनी भी अब संग नि रैगी
वा जेठा नोना मा, मि कणसा मा व्हेग्या दूर दूर
बूढ़ेन्दा का जू सुप्न्या बूणी छा वू व्हेगेन चूर चूर
नाती नातेणा भी ताना मरदन ब्वारी भी टोकणी रांद
बुढ़ापा आन्द देखेणू च ज्वानी नि देखेणी जान्द
आन्ख्यूं मा आँसू ऍ जन्दिन ज्वनी की याद जब आन्दी
मि भितर किचन मा, बूढ़ीड़ भैर बालकनी मा रोणी रांदी
सैंती पाई जोंते वी अब हमरी खैर खबर नि लेन्दन
भली बुरी चीज त छोड़ा, तम्बाकू कू ते भी पैंसा नि देन्दा
खाली किसों मा हाथ डाई की बार बार मि उन्ते जप्कांद
बुढ़ापा आन्द देखेणू च ज्वानी नि देखेणी जान्द
कोना कोठ्यारू मा भी अब अन्न नि बच्यू चा
उजेवू हर्चिगी हमरी ज़िन्दगी कू,बस अब अन्धेरू बच्यू चा
हे भगवान, एखुली नि छोड़ी हमते तू , दगड़ी लीजे हम द्वी का प्राण
एक दूजा का सहारा पर छा हम जिन्दा, एखुली हमन कन्मा राण
अब पता नि मिल्दू की नि मिल्दू हमते अपड़ो कू काँध
बुढ़ापा आन्द देखेणू च ज्वानी नि देखेणी जान्द
No comments:
Post a Comment