जू बीतगी स्यू बीतगी बणगी कल।
पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल ।।
यूँ तारों से भी हमन सीख नी ले ।
जू सूर्या का उज्यवा मा हर्चि जन्दन।
रात पोड्दी ही यी धरती ते रोशन कर जन्दन।
पैथर नि फरख तू सीधा अगने चल।
जू बीतगी स्यू बीतगी बणगी कल ।
अगर पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल।।
ये पाणी से भी तिन सीख नि ले ।
बणी की बादल जू उड़ी जांदू आगाश ।
बरखी की फिर बरखा यी धरती की बुझे जांदू प्यास ।
छोड़दी अब पश्ताण तू अब न हाथ मल ।
जू बीतगी स्यू बीतगी बणगी कल ।।
अगर पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल
यूँ फूलूं से भी तिन सीख नि ले ।
बुरा भला द्वी जग्गों मा अन्दन काम।
कांडो की दगड़ी रैकी ते भी हमेशा ऊँचू रखदन अपडू नाम।
छल कपट कू बाठू छोड़ तू अब सत्या का बाठा ढल ।
जू बीतगी स्यू बीतगी बणगी कल ।
अगर पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल ।।
यी चोली से भी तिन सीख नि ले ।
ज्व़ा गंगवा किनरा रैकी ते भी सारग कू देखदी नीरज।
तिसाई रैंदी पर अपडू नि खोन्दी धिराज ।
बस सब्र रख तू त्वे भी मिलोलू तेरा करमू कू फल।
जू बीतगी स्यू बीतगी बणगी कल ।
अगर पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल।।
प्रदीप सिंह रावत ''खुदेड ''
''फ्योली की आँखयू मा आँसू'' पुस्तक बटी
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पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल ।।
यूँ तारों से भी हमन सीख नी ले ।
जू सूर्या का उज्यवा मा हर्चि जन्दन।
रात पोड्दी ही यी धरती ते रोशन कर जन्दन।
पैथर नि फरख तू सीधा अगने चल।
जू बीतगी स्यू बीतगी बणगी कल ।
अगर पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल।।
ये पाणी से भी तिन सीख नि ले ।
बणी की बादल जू उड़ी जांदू आगाश ।
बरखी की फिर बरखा यी धरती की बुझे जांदू प्यास ।
छोड़दी अब पश्ताण तू अब न हाथ मल ।
जू बीतगी स्यू बीतगी बणगी कल ।।
अगर पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल
यूँ फूलूं से भी तिन सीख नि ले ।
बुरा भला द्वी जग्गों मा अन्दन काम।
कांडो की दगड़ी रैकी ते भी हमेशा ऊँचू रखदन अपडू नाम।
छल कपट कू बाठू छोड़ तू अब सत्या का बाठा ढल ।
जू बीतगी स्यू बीतगी बणगी कल ।
अगर पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल ।।
यी चोली से भी तिन सीख नि ले ।
ज्व़ा गंगवा किनरा रैकी ते भी सारग कू देखदी नीरज।
तिसाई रैंदी पर अपडू नि खोन्दी धिराज ।
बस सब्र रख तू त्वे भी मिलोलू तेरा करमू कू फल।
जू बीतगी स्यू बीतगी बणगी कल ।
अगर पकड़ सकदे त पकड़ी रख ये पल।।
प्रदीप सिंह रावत ''खुदेड ''
''फ्योली की आँखयू मा आँसू'' पुस्तक बटी
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